8th Pay Commission Salary Hike: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए वर्तमान में आठवां वेतन आयोग बने को लेकर कर्मचारी संगठन में मांगे तेज हो गई हैं।
इसी को देखते हुए फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्ट आर्गेनाइजेशन ने नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसलटेटिव मेकैनिज्म स्टाफ साइड को एक ज्ञापन भेजा गया है।
जिसमें मांग उठाई गई की 8 पर वेतन आयोग में फिटनेस फैक्टर 3.0 से बढ़कर 3.25 के बीच रखा जाए यदि सरकार इस विज्ञापन को ध्यान में रखते हुए सैलरी बढ़ती है।
तो अभी 18000 रुपए की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर 54000 तक पहुंच जाएगी भाई उच्च स्तर के कर्मचारियों के वेतन में इससे भी ज्यादा बढ़ोतरी होगी।
8th Pay Commission को लेकर क्या है डिटेल जानकारी
काफी लोगों के मन में सवाल है कि क्या 3.0 फिटनेस फैक्टर सिर्फ एक अनुमान है या इसके पीछे कोई लॉजिक या ठोस गणित भी है।
इसको देखते हुए दरअसल वेतन आयोग को न्यूनतम वेतन तय करने के लिए 1997 की 15वीं इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस के मन को के आधार पर तय किया जाता है।
यह मानक प्रसिद्ध पोशाक एसएससी के डॉक्टर वालेस इस रोड के वैज्ञानिक पोषण मॉडल पर आधारित होता है।
इन नियमों के अनुसार ही एक कर्मचारी के उनके परिवार के लिए जरूरी खाने पीने की चीज कपड़े ईंधन बिजली पानी शिक्षा मनोरंजन जैसी जरूर को ध्यान में रखते हुए वेतन तय किया जाता है
कर्मचारी संगठनों की मांग
इस आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर एक इसमें चावल सब्जियां फल दूध कपड़े ईंधन बिजली और पानी जैसे खर्चों को शामिल होते हैं।
खास बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार की लग्जरी या वैकल्पिक खर्च के लिए वेतन नहीं दिया जाता है ताकि गणना वास्तविक और संतुलित बनी रहे।
अप एनपीओ ने अपने प्रस्ताव के माध्यम से दिल्ली मुंबई चेन्नई कोलकाता बेंगलुरु हैदराबाद भुवनेश्वर और त्रिवेंद्रम जैसे बड़े शहरों में खुदरा धर्मों का औसत निकालकर खर्च का अनुमान लगाया जाता है।
कर्मचारी संगठनों का यह भी कहना है कि आज के समय में कुछ नई चीजों की भी जरूरत होती है।
पुराने समय के अनुसार आठवें वेतन आयोग को तैयार नहीं करके नए मॉडल के अनुसार आठवां वेतन आयोग तैयार किया जाएं।
इसलिए 8th Pay Commission के लिए एलपीजी गैस मोबाइल इंटरनेट जैसे आवश्यक खर्चों को भी शामिल करना आवश्यक है।
इसके अलावा आवास और स्किल डेवलपमेंट पर होने वाले बुनियादी जरूरत को भी महंगाई भत्ते में शामिल किया जाए
एफएनपीओ के अनुसार यदि कोई कर्मचारी के परिवार को तीन यूनिट मानकर गणना की जाए तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 46000 बनती है।
यह परिवार यूनिट है जिसे सातवें वेतन आयोग में माना गया था लेकिन संगठन की मांग है कि अब परिवार की गणना 5 यूनिट के आधार पर की जाएं।
जिसमें माता-पिता को भी शामिल किया जाए अगर इस प्रकार होता है तो न्यूनतम वेतन की मांग को बढ़ाकर 76360 तक पहुंचाने की संभावना है।
54000 न्यूनतम सैलरी की मांग
फिलहाल एफएनपीओ द्वारा अपने ज्ञापन में सरकार को कम से कम 54000 सैलरी करने की मांग की गई है और 3.0 फिटनेस फैक्टर लागू करने की भी मांग रखी गई है।
इसके अनुसार संगठनों का कहना है कि कोविद के बाद चिकित्सा खर्च में बढ़ोतरी हुई है और महंगाई और जीवन यापन की लागत में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
साथ ही आवास भत्ता कम से कम 7.5% और वेतन में 25% स्केल कंपोनेंट जोड़ने की मांग की गई है आठवें वेतन आयोग में इन मांगों पर यदि विचार किया जाता है तो कर्मचारियों को काफी फायदा होगा।

Aarzoo Balwar
Nice and good